इन दिनों सोशल मीडिया पर एक अजीबोगरीब ट्रेंड ज़बरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब, रेडिट और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सैकड़ों वीडियो शेयर किए जा रहे हैं, जिनमें लोग एक मोबाइल ऐप के ज़रिए बीच सड़क पर चल रहे ई-रिक्शा की बैटरी को अचानक बंद कर देते हैं। इस ट्रेंड को इंटरनेट पर “टिर्री कंट्रोल” नाम दिया गया है, और यह चालकों के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है।
BAT BMS Apps क्या है पूरा मामला?
इस पूरे ट्रेंड के केंद्र में BAT-BMS नाम का एक मोबाइल ऐप है, जिसे चीन की कंपनी शेनझेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी ने बनाया है। असल में यह ऐप बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) की निगरानी के लिए डिज़ाइन किया गया एक वैध टूल है। इसका मकसद ब्लूटूथ-सक्षम लिथियम बैटरियों की वोल्टेज, तापमान और करंट जैसी जानकारी को रियल-टाइम में मॉनिटर करना है। यह मुख्य रूप से सोलर पावर, मरीन और ऑफ-ग्रिड सिस्टम के लिए बनाया गया था, न कि वाहनों के लिए।
क्या अब मुस्लिम आटो चालक को BAT BMS Apps के जरिए परेशान किया जाएगा ?
किसी ने अपनी नीचता दिखाते हुए मुस्लिम बुजुर्ग का आटो लॉक कर दिया और वहाँ बिना अनलॉक किए ही भाग गए।
फिर बुजुर्ग अपना आटो खींचते हुए लाए उनका पूरा दिन खराब हो गया इससे परेशान होकर वो रोने लगे
देखिए बुजुर्ग रो… pic.twitter.com/JEnasuCmGs
— Afsar Khan Raipuri (@Afsar__khan) July 2, 2026
लेकिन कुछ यूज़र्स ने इसका एक अलग ही इस्तेमाल खोज निकाला। भारत में कई सस्ते ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक स्कूटर चीन में बनी बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें सुरक्षा फीचर बेहद कमज़ोर हैं। कई बैटरियों का ब्लूटूथ बिना किसी पासवर्ड या ऑथेंटिकेशन के खुला रहता है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति 10 से 15 मीटर की दूरी से इन बैटरियों से जुड़कर उनका पावर आउटपुट बंद कर सकता है।
वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है?
वायरल वीडियो में लोग सड़क पर चल रहे ई-रिक्शा के पास जाते हैं, अपने फोन से BAT-BMS ऐप खोलते हैं, बैटरी से कनेक्ट करते हैं और डिस्चार्ज स्विच को बंद कर देते हैं। इससे रिक्शा अचानक रुक जाता है और चालक हैरान-परेशान रह जाता है। एक वायरल रील के कैप्शन में लिखा गया, “टिर्री वालों ने बहुत परेशान किया है, अब इनकी रैली बनेगी” — जिससे साफ पता चलता है कि यह ट्रेंड ई-रिक्शा चालकों की लापरवाह ड्राइविंग को लेकर आम लोगों की नाराज़गी से भी जुड़ा हुआ लगता है।
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चालकों की मुश्किलें बढ़ीं
इस “मज़ाक” का खामियाजा सीधे तौर पर ई-रिक्शा चालकों को भुगतना पड़ रहा है। कई वीडियो में चालक बीच सड़क पर फंसे नज़र आते हैं, जिन्हें यह भी नहीं पता होता कि उनकी गाड़ी अचानक बंद क्यों हो गई। कई चालकों के पास स्मार्टफोन या तकनीकी जानकारी ही नहीं है, जिससे वे खुद अपनी गाड़ी दोबारा चालू नहीं कर पाते। ऐसे में उन्हें राहगीरों की मदद लेनी पड़ती है, और कुछ मामलों में तो चालकों ने बैटरी दोबारा चालू कराने के लिए अजनबियों को 100 से 200 रुपये तक चुकाए हैं।
एक वीडियो में तो एक चालक अपने बंद पड़े रिक्शा को हाथ से धकेलते हुए घर ले जाता नज़र आया। रोज़ की कमाई पर निर्भर इन चालकों के लिए यह रुकावट सीधे उनकी जेब पर असर डालती है।
क्या यह दावा पूरी तरह सच है?
हालांकि, इस वायरल ट्रेंड को लेकर एक ज़रूरी बात सामने आई है — फैक्ट-चेक रिपोर्ट्स के मुताबिक यह दावा उतना सीधा नहीं है जितना दिखाया जा रहा है। जांच में पता चला है कि BAT-BMS ऐप से किसी भी ई-रिक्शा को जोड़ने के लिए बैटरी की एक खास आईडी की ज़रूरत होती है, यानी हर बैटरी को यूं ही रैंडम तरीके से हैक नहीं किया जा सकता।
इसके अलावा, भारत में चलने वाले ज़्यादातर ई-रिक्शा अब भी पुरानी लेड-एसिड बैटरी पर चलते हैं, जिनमें ब्लूटूथ कनेक्टिविटी होती ही नहीं — इसलिए वे इस समस्या से पूरी तरह अछूते हैं। यहां तक कि लिथियम बैटरी वाले कई वाहन भी ऐसे प्रोप्राइटरी BMS सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं जो BAT-BMS जैसे थर्ड-पार्टी ऐप के साथ काम ही नहीं करते। कुछ यूज़र्स ने वायरल वीडियो को दोहराने की कोशिश भी की, लेकिन बताया कि इसके लिए वाहन के स्थिर होना, बेहद कम दूरी पर होना और सही किस्म की असुरक्षित बैटरी मिलना ज़रूरी है — यानी हर बार यह तरीका काम नहीं करता।
अभी तक किसी भी सरकारी एजेंसी या प्रशासन की ओर से इस BAT-BMS मामले पर आधिकारिक बयान नहीं आया है।
ऐप की मौजूदा स्थिति
BAT-BMS ऐप अभी भी गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है, हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक इसे ऐपल के आईओएस ऐप स्टोर से हटा दिया गया है। ऐप को यूज़र्स की ओर से अपेक्षाकृत कम रेटिंग मिली है, और कई रिव्यू में कनेक्टिविटी से जुड़ी दिक्कतों का ज़िक्र किया गया है।
सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
भले ही यह दावा जितना बताया जा रहा है उतना आसान न हो, लेकिन इस पूरे मामले ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी सुरक्षा को लेकर एक गंभीर सवाल ज़रूर खड़ा कर दिया है। अगर बिना पासवर्ड वाली ब्लूटूथ बैटरी सिस्टम किसी के भी हाथ लग सकती है, तो चलते वाहन के साथ इस तरह की छेड़छाड़ सड़क सुरक्षा के लिहाज़ से भी खतरनाक साबित हो सकती है। जानकारों का कहना है कि वाहन निर्माताओं को बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में मज़बूत सुरक्षा फीचर, जैसे पासवर्ड प्रोटेक्शन और ऑथेंटिकेशन, जोड़ने की ज़रूरत है।
निष्कर्ष
BAT-BMS ऐप को लेकर वायरल हुआ यह ट्रेंड भले ही मनोरंजन या “बदले” के तौर पर शुरू हुआ हो, लेकिन इसने आम ई-रिक्शा चालकों की रोज़ी-रोटी पर सीधा असर डाला है। साथ ही यह भारत में सस्ते इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल हो रही बैटरी टेक्नोलॉजी की सुरक्षा खामियों को भी उजागर करता है। हालांकि दावे की पूरी सच्चाई अभी विवादित है, फिर भी यह मामला डिजिटल सुरक्षा और ज़िम्मेदार तकनीकी इस्तेमाल पर एक ज़रूरी बहस छेड़ चुका है।
(यह BAT-BMS रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी सरकारी एजेंसी की ओर से इस मामले पर अभी तक पुष्टि नहीं की गई है।)

