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Ajmer Dargah Shiv Mandir Claim: दरगाह में मंदिर होने के दावे पर कोर्ट सुनवाई | 21 फरवरी

Ajmer Dargah Shiv Mandir Claim

Ajmer Dargah Shiv Mandir Claim: दरगाह में मंदिर होने के दावे पर कोर्ट सुनवाई | 21 फरवरी

अजमेर (राजस्थान): देश की ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला सीधे न्यायालय तक पहुंच चुका है, जहां दरगाह परिसर के भीतर प्राचीन शिव मंदिर होने का दावा किया गया है। इस दावे ने न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश में राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।

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महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार द्वारा दायर याचिका को सिविल कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इस याचिका के जरिए यह दावा किया गया है कि अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह का निर्माण एक पुराने शिव मंदिर को तोड़कर किया गया था।

सिविल कोर्ट ने याचिका स्वीकार की, सरकार को भेजा नोटिस

याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एपी सिंह ने सिविल कोर्ट में पक्ष रखा। अदालत ने सोमवार को प्रारंभिक सुनवाई करते हुए याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही अदालत ने राजस्थान सरकार के पुरातत्व विभाग, केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय को नोटिस जारी किया है।

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कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 21 फरवरी तय की है। अब इस दिन संबंधित विभागों को अपना जवाब अदालत में पेश करना होगा।

याचिका में क्या-क्या दावे किए गए हैं?

याचिका में दावा किया गया है कि दरगाह परिसर के भीतर मौजूद संरचनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि यहां पहले एक महादेव का भव्य मंदिर था। याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐतिहासिक और राजस्व दस्तावेजों में इस स्थान का उल्लेख एक मंदिर के रूप में मिलता है।

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परमार ने अपनी याचिका में कहा है कि जिस प्रकार अयोध्या, काशी, संभल और सोमनाथ जैसे धार्मिक स्थलों पर ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने आई है, उसी तरह अजमेर में भी सच्चाई उजागर होनी चाहिए।

पृथ्वीराज चौहान की नगरी और मंदिर का दावा

याचिका में यह भी कहा गया है कि अजमेर पृथ्वीराज चौहान की राजधानी रही है और यहां स्थित महादेव मंदिर को आक्रांताओं द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था। इसके बाद उसी स्थान पर दरगाह का निर्माण किया गया।

याचिकाकर्ता का दावा है कि यह सिर्फ आस्था का विषय नहीं बल्कि ऐतिहासिक साक्ष्यों और दस्तावेजों से जुड़ा मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

देशभर में बढ़ती धार्मिक स्थलों से जुड़ी याचिकाएं

बीते कुछ वर्षों में देश की अदालतों में धार्मिक स्थलों से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। अयोध्या राम मंदिर विवाद के फैसले के बाद काशी विश्वनाथ और मथुरा से जुड़े मामलों ने भी जोर पकड़ा है। अब अजमेर दरगाह का यह मामला एक नई बहस को जन्म दे रहा है।

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लेखक

Rakesh Kumar

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