सोमवार सुबह जो खबर सबसे पहले आई
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश और कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी है, साथ ही 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएं चलने की आशंका जताई है। यही वजह रही कि सुबह होते-होते बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने सभी सरकारी, निजी और नगर निगम संचालित स्कूल-कॉलेजों को बंद रखने का निर्देश जारी कर दिया।
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पड़ोसी जिलों की हालत मुंबई से भी ज़्यादा गंभीर
अगर मुंबई में ऑरेंज अलर्ट है, तो ठाणे और पालघर में सीधे रेड अलर्ट जारी हुआ है। पुणे जिले में भी भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी के बाद रेड अलर्ट के चलते सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई। मुंबई विश्वविद्यालय ने भी एहतियातन सोमवार को होने वाली सभी परीक्षाएं टाल दी हैं, ताकि छात्रों को किसी तरह के जोखिम में न डाला जाए।
घाट सेक्शन में जब पहाड़ खिसकने लगा
रात के अंधेरे में ही मुंबई-पुणे रेल मार्ग पर सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाने वाला कर्जत-लोणावला भोर घाट सेक्शन बुरी तरह प्रभावित हुआ। थकुरवाड़ी के पास भूस्खलन की सूचना मिलते ही रेलवे ने एहतियातन इस व्यस्त मार्ग पर ट्रेन सेवाएं रोक दीं। इस घाट में तीन पटरियां हैं — अप लाइन (मुंबई की ओर), डाउन लाइन (पुणे की ओर) और एक मिडिल लाइन — लेकिन भूस्खलन ने तीनों पर असर डाला। नतीजा यह हुआ कि सीएसएमटी-पुणे इंद्रायणी एक्सप्रेस, डेक्कन एक्सप्रेस, डेक्कन क्वीन, प्रगति एक्सप्रेस और सिंहगड एक्सप्रेस समेत करीब एक दर्जन से ज़्यादा ट्रेनें रद्द या प्रभावित हुईं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद इस स्थिति की समीक्षा की।
एक्सप्रेसवे पर भी थमी रफ्तार
सड़क मार्ग की बात करें तो मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर खंडाला निकास के पास मिसिंग लिंक हिस्से में बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसके बाद मुंबई की ओर जाने वाली लेन पूरी तरह बंद करनी पड़ी। राहत की बात यह रही कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, और मार्ग को फिर से खोलने का काम जारी है।
हवाई सफर भी बारिश के आगे बेबस
छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी बारिश का असर दिखा, जहां लगभग एक घंटे के लिए उड़ान परिचालन रोकना पड़ा। इससे पहले के दिनों में भी खराब मौसम के चलते कई उड़ानें डायवर्ट की जा चुकी हैं — इंडिगो और एयर इंडिया की कुछ फ्लाइट्स को सूरत, अहमदाबाद और गोवा जैसे शहरों की ओर मोड़ना पड़ा था, हालांकि बाद में मौसम सुधरने पर ज़्यादातर विमान मुंबई लौट आए।
पिछले चार दिन का हिसाब-किताब
यह अचानक आई आफत नहीं है, बल्कि बीते चार दिनों से लगातार बरस रहे बादलों का नतीजा है। BMC के आंकड़ों के मुताबिक शहर के कई हिस्सों में बीते 24 घंटों में ही 250 से 300 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज हुई, जबकि चार दिनों में कुल मिलाकर करीब 588 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। विक्रोली में सबसे ज़्यादा 316 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार महाराष्ट्र तट के पास बने एक अपतटीय मौसमी सिस्टम की वजह से यह बारिश 7 जुलाई तक जारी रह सकती है।
जब सड़कें नदियों में बदल गईं
अंधेरी, मलाड और कुर्ला जैसे इलाकों में अंडरपास पानी में डूब गए, वहीं वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे, एसवी रोड और न्यू लिंक रोड जैसी प्रमुख सड़कों पर भी गहरा पानी भर गया। सिर्फ मुंबई ही नहीं, नवी मुंबई और ठाणे के ऐरोली, कोपरखैरणे जैसे इलाकों से भी जलभराव की खबरें आईं, जिससे मुंबई ट्रांस हार्बर और ईस्टर्न एक्सप्रेस कॉरिडोर से जुड़ने वाले रास्तों पर बसों और निजी वाहनों को भीतरी सड़कों का सहारा लेना पड़ा।
लोकल ट्रेनें चलीं, पर राहत की सांस अधूरी
शहर की जीवनरेखा कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा पूरी तरह ठप नहीं हुई, लेकिन निचले इलाकों की पटरियों पर पानी भरने से सेंट्रल और वेस्टर्न रेलवे कॉरिडोर पर स्पीड रिस्ट्रिक्शन और बीच-बीच में ठहराव लगाना पड़ा। कुछ ट्रेनें तय स्टेशन से पहले ही रोक दी गईं, जब पटरियों के आसपास पानी का स्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया। मेट्रो सेवाएं ज़्यादातर सामान्य रहीं, हालांकि एलिवेटेड स्टेशनों तक पहुंचने वाली सड़कों पर जलभराव से यात्रियों को दिक्कत हुई।
प्रशासन मैदान में, पर चुनौती बड़ी
BMC ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए शहर भर में करीब 10,000 कर्मचारी तैनात किए हैं। प्रशासन ने साफ कहा है कि सरकारी और निजी दफ्तर सामान्य रूप से खुले रहेंगे, लेकिन नागरिकों से अपील की गई है कि जब तक बेहद ज़रूरी न हो, घर से बाहर न निकलें। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को खास तौर पर सतर्क रहने को कहा गया है।
आम मुंबईकर की सोमवार सुबह
दफ्तर जाने वालों के लिए यह सोमवार आसान नहीं रहा। कहीं छाता संभालते हुए ऑटो का इंतज़ार, तो कहीं भरी सड़क पर घुटनों तक पानी से गुज़रते लोग — यही मुंबई के मानसून की पहचान बन चुकी तस्वीर एक बार फिर दोहराई गई। पिछले दिनों पेड़ गिरने की करीब 18 घटनाएं भी दर्ज हुई थीं, जो बताती हैं कि तेज़ हवाओं का असर सिर्फ यातायात तक सीमित नहीं रहा।
आगे क्या? मौसम विभाग की नज़र लगातार
IMD और BMC दोनों ने साफ किया है कि अगले 24 घंटे अहम हैं, क्योंकि बारिश की तीव्रता में अचानक बदलाव आ सकता है। तटीय इलाकों में ऊंची लहरों और हाई टाइड की वजह से जलभराव और बढ़ने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग की सलाह है कि अगले कुछ दिन तक लोग ताज़ा चेतावनियों पर नज़र बनाए रखें, क्योंकि तट के पास बना मौसमी सिस्टम अभी कमज़ोर नहीं पड़ा है। रेलवे और एयरपोर्ट प्रशासन दोनों स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, और अगर बारिश की रफ्तार और तेज़ हुई तो और मार्गों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल शहर की उम्मीद यही है कि जल्द राहत मिले, इससे पहले कि मानसून का यह दौर और मुश्किलें खड़ी करे।