भारत में आपको चीन की तारीफ करने वाले कई वामपंथी मिल जाएंगे। भारत एक लोकतांत्रिक देश है, फिर भी यह लोग अक्सर भारत की तुलना चीन से करते रहते हैं। लेकिन पहली बार चीन ने वह नायाब तरीका दिखाया है, जिसे अगर भारत ने भी लागू कर दिया तो विदेशों में बैठे लोग भारत में प्रदर्शन नहीं करवा पाएंगे। China CJP Protest जैसे हुड़दंगियों से निपटने का जो तरीका अपनाता है, वह अब दुनिया के सामने एक मिसाल बनकर आया है।
चीन ने एक शानदार रणनीति के जरिए फॉरेन फंडेड प्रदर्शनों को पूरी तरह खत्म कर दिया है। चीन ने तीन तरीकों से यह सफलता हासिल की है — इस लेख में हम आपको विस्तार से बताएंगे।
भारत में प्रदर्शनों से कितना नुकसान होता है?
आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि प्रोटेस्ट, हिंसा, हड़ताल और सामाजिक अशांति की वजह से भारत की जीडीपी को सालाना 6 से 9% तक का नुकसान होता है। यह आंकड़े हर साल बदल सकते हैं, लेकिन दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए 2-4% का नुकसान भी बहुत चिंताजनक है।
दुनिया के कई देश सिर्फ एनजीओस के जरिए भारत की कई विकास परियोजनाओं को रुकवाने का काम करते हैं। इन प्रोजेक्ट्स को लटकाने और अटकाने की रणनीति लगातार अपनाई जाती है।
China CJP Protest चीन का थ्री गॉर्जेस डैम मॉडल
आपको याद होगा कि जब चीन ने यांग्त्ज़ी नदी पर थ्री गॉर्जेस बांध बनवाया था, तो लगभग 2 करोड़ पेड़ काटे गए थे। लेकिन उस दौरान चीन में कोई प्रोटेस्ट नहीं हुआ, किसी ने काम को नहीं रोका। यहां तक कि दुनिया में भी किसी ने चीन के उस प्रोजेक्ट का विरोध नहीं किया।
इसके उलट, जब भारत कोई बांध, न्यूक्लियर पावर प्लांट या कोई स्ट्रेटेजिक प्रोजेक्ट बनाता है, तो कई एनजीओस प्रदर्शन करने उतर आते हैं और अदालतों में पीआईएल डालकर इन प्रोजेक्ट्स को अटकाया जाता है।
भारत में एनजीओ की रुकावटें: ग्रेट निकोबार और कुडनकुलम
उदाहरण के लिए, मलक्का जलडमरूमध्य के पास बन रहे ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को ही देख लीजिए। यह प्रोजेक्ट भारत की किस्मत बदलने वाला है और चीन को रणनीतिक चुनौती देने वाला है।
2012 में रूस की मदद से तमिलनाडु में कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट का काम शुरू किया गया था, लेकिन कई एनजीओस ने पैसा लेकर इस प्रोजेक्ट को लटकवा दिया। खुद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस पर चिंता जताई थी। जांच में पता चला कि अमेरिका ने भारत के कुछ एनजीओस को लेप्रसी के मरीजों और दिव्यांग लोगों की भलाई का बहाना बनाकर पैसा दिया था, और उसी पैसे का इस्तेमाल एनजीओस ने स्थानीय लोगों से प्रदर्शन करवाने के लिए किया।
चीन में एनजीओ पर लगाम: तीन बड़े कानून
चीन ने ऐसा क्या किया कि वहां कोई प्रदर्शन नहीं हुआ? पिछले कुछ सालों में चीन में एनजीओस की संख्या 7000 से घटकर सिर्फ 728 रह गई है। इसके पीछे चीन के तीन बड़े कानून हैं:
- चैरिटी लॉ — इसके तहत चैरिटेबल संस्थाओं पर नकेल कसी गई।
- ओवरसीज एनजीओ लॉ — इसके तहत विदेशी एनजीओस पर नकेल कसी गई।
- नेशनल सिक्योरिटी लॉ — इसके तहत सभी एनजीओस की कड़ी जांच की गई ताकि पता लगाया जा सके कि कोई एनजीओ चीन की सुरक्षा के लिए खतरा तो नहीं है।
चीन में एनजीओ के लिए पुलिस रजिस्ट्रेशन, गवर्नमेंट स्पॉनसरशिप और सालाना फंडिंग व एक्टिविटी डिस्क्लोज़र अनिवार्य है।
भारत में अब क्या बदलने वाला है: FCRA में बड़ा संशोधन
भारत में अभी तक एनजीओस पर नकेल कसने वाले कानून काफी कमजोर रहे हैं। आज भी भारत में विदेशों से पैसा लेने वाले करीब 35,000 से ज्यादा एनजीओ मौजूद हैं। इनमें से कई एनजीओस ने भारत के प्रोजेक्ट्स के खिलाफ विरोध कर भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का काम किया है।
हालांकि अब भारत एफसीआरए (फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट) में बड़े बदलाव करने जा रहा है:
- विदेशों से आने वाली फंडिंग के सोर्स की जानकारी अब एनजीओस को देनी होगी।
- फंडिंग प्राप्त करने के लिए एसबीआई, दिल्ली में अकाउंट खुलवाना अनिवार्य होगा — यानी विदेश से आने वाले हर ₹1 का हिसाब अब रखा जाएगा।
- नए कानून के तहत एनजीओस अब पैसे का इस्तेमाल धर्मांतरण के लिए नहीं कर पाएंगे।
- कोई मिशनरी संस्थान या एनजीओ गलत काम करता पकड़ा गया तो उसकी संपत्ति पर अब भारत सरकार का कब्जा हो जाएगा।
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